"बस मंज़िल ही प्यार हो "....
जब इच्छाओं का भंडार हो और कोशिशें अपार हो तो बस तुम्हे रुकना नहीं चाहे रुकावटे हज़ार हो वक़्त की मार हो या कमियों का शिकार हो कि रास्ते से लौटना नहीं चाहे सामने दीवार हो भटका कोई विचार हो या चुनातियों का वार हो तुम्हे पीछे हटना नहीं चाहे हार कई बार हो लक्ष्य प्राप्ति ही सार हो और जीत का इंतेज़ार हो मेहनत करके थकना नहीं बस मंज़िल ही प्यार हो