" सपनें और अपनें "
सामने दीवार थी ,दूजी तरफ एक केज था बीच में लड़की खड़ी ,जहाँ उड़ने से परहेज था मझधार सी थी वो दशा ,चुनना था एक रास्ता मन में थे सपने बहुत, मगर अपनों का था वास्ता दौड़ने में थी प्रबल, पढ़ने में वो कमजोर थी इ म्तेहान नजदीक थे पर , वो दौड़ स्पर्धा की ओर थी समय कुछ बीता और , अब दौड़ने का वक्त था शहर में जाना था उसे, पर परिवार उसका शख्त था जीतने की मंशा लेकर , जब जताया अपना भाव अनुमति न मिली बल्कि, बस मिला कि करो चुनाव परिवार ही अवरोध बने , तो समाज से आस ही क्या जो सिर्फ शिक्षा में अग्रसर करे, ऐसा विश्वास ही क्या ठान ली उस वक़्त वो ,अब न करेगी तर्क को लांगेगी वह दीवार और , मिटा देगी इस फर्क को चुना उसने सपनों को, और पा लिया ऐसा मुकाम गर्व है अपनों को उस पर, कर गयी है रौशन नाम -- Ankita Tantuway