"आइये, मरते हुए लोकतंत्र से मिलवाउं आपको"...By Ankita Tantuway.
आइए, उस देश का चेहरा दिखाऊँ आपको, चमचमाते शहर से थोड़ा हटाऊँ आपको। जहाँ ऊँचे मंच पर आदर्श के हैं भाषण बहुत, भूख की चौखट पे थोड़ा लेकर जाऊँ आपको। जहाँ कागज़ पर सभी अधिकार जीवित हैं अभी, पर हक़ीक़त की ज़मीं पर घाव गिनवाऊँ आपको। जहाँ कानून की देवी आँख बाँधे तो खड़ी, पर तराज़ू किस तरफ़ झुका, आओ बताऊँ आपको। पूछिए उस खेत से जो प्यास में सूखा पड़ा, पूछिए उस हाथ से जो रोज़ मेहनत कर थका। पूछिए उस माँ से जिसने रोटियों को बाँटकर, अपने बच्चों की हँसी में दर्द को चुपचाप रखा। मत कहो, हर ओर बस विकास की तस्वीर है, कुछ दरारें भी हैं, जिनसे झाँकती तक़दीर है। एक तरफ़ उत्सव सजा है रोशनी के नाम पर, एक तरफ़ अँधेरों में अब भी काँपती जागीर है। आइए उस मोड़ पर, जहाँ डिग्रियाँ बिकती नहीं, बस अलमारी में सजी रहती हैं वो ख़ामोश-सी। रोज़ अख़बारों में देखो, नौकरियों के स्वप्न हैं, रोज़ लौटे एक युवा, फिर आँख नम, ख़ामोश-सी। एक हाथ में फ़ाइलें हैं, एक हाथ में उम्र है, इंतज़ार की धूप में हर रोज़ जलता आदमी। मेहनतों का मोल पूछो उस थके इंसान से, जिसके सपनों को निगलता जा रहा है आदमी। आइए उस दफ़्तरों की धूल भी देखिए ज़रा...