Posts

Showing posts from 2023

"पढ़ते हुए संविधान को, अखबार याद आ गया " By Ankita Tantuway

पढ़ते हुए संविधान को ,अखबार याद आ गया जुल्म की खबरे थी इतनी ,मन मेरा घबरा गया पढ़े आर्टिकल संशोधन इसके, लगा बड़ा मजबूत है पालन कैसा हो रहा देश में, पनपता अपराध सबूत है मारपीट हो गरीबों से, या बात हो दुष्कर्म की अपराध ऐसे जी रहा, कि न चली किसी धर्म की  मासूम तक मजबूर है , कह रहे कर लो दया  भयभीत मुझको कर रही, हर रोज बढ़ती निर्भया मणिपुर बना गुनाह केंद्र, यूँ ही घरों को जलाया गया शर्मशार हुई मानवता फिर, बेटी को निवस्त्र घुमाया गया जब देश की व्यवस्था, आज हो रही ध्वस्त है  तो मतों की भिखारी , बस राजनीति में व्यस्त है  सोचने को हूँ विवश मैं , कानून का क्यों शोर नहीं इतनी शिथिलता है यहाँ, प्रशासन का क्यों जोर नहीं कहने को तो ये दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है फिर क्यों हिंसा बढ़ रही, क्यों देशवासी परेशान है.....  कि फिर क्यों हिंसा बढ़ रही, क्यों देशवासी परेशान है.....  ~ अंकिता तंतुवाय ✍️

Dr. Bhimrao Ambedkar Poetry on ambedkar jayanti by Ankita Tantuway

 Dr Bhimrao Ambedkar was  ( An Indian Jurist, Economist  , Social Reformer & Political Leader)  माँ से प्रश्न करता वह बालक,  क्यों पानी का अधिकार नहीं?  शिक्षा से हम वंचित क्यों है?  क्यों हमारा कोई विचार नहीं!  हमने तो साफ कपड़े भी पहने,  फिर ये  दूषित क्यों कहते है ?  दलित होना कोई गुनाह है क्या?  फिर हम क्यों ये सब सहते है !  नीची जाति के नाम पर,  हर बार उन्हें नकारा गया ।  तर्क की ज्वाला और भी बढ़ी,  जब अछूत कहकर  पुकारा गया।  स्पर्श तो दूर की बात ,  परछाई तक से भागा जाता था।  दलितोँ की पहचान के खातिर,  हंडी बांधा जाता था।  देखकर भीम ने अत्याचार ,  शिक्षा का मार्ग था चुना।  फिर भी संघर्ष कहाँ रुका ,  इसमें भी जाने क्या क्या सुना।  पढ लिखकर जब वापस लौटे,  फिर भी सामान व्यवहार नहीं।  प्यून तक फाइल फेक कर देता ,  कहता यहाँ बैठना भी अधिकार नहीं।  अब मन में नयी क्रांति लेकर,  ये भेदभाव मिटाने चले।  बाबा साहेब समाज में ,  ...