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हाँ समाज के वो दोगले लोग | Navratri Special | By Ankita Tantuway

बात बात पे माँ बहन के नाम गाली देने वाले,  मन्दिर में "जय माता दी "के नारे लगाते लोग | हाँ समाज के वो दोगले लोग || घर की स्त्रियों को अक्सर पाबंद करने वाले ,  माँ की शक्तियों का खूब बखान करते लोग | हाँ समाज के वो दोगले लोग || स्त्री के चूड़ी पहनने को कमजोर बताने वाले ,  माँ को पूरा करने सोलह श्रृंगार चढ़ाते लोग | हाँ समाज के वो दोगलेे लोग || दोबारा बेटी जन्म लेने पर उदास होने वाले,  माँ के नौ रूपों का सत्कार करते लोग | हाँ समाज के वो दोगले लोग || बेटियों के उस रक्त को अशुद्ध कहने वाले,  माता के लाल रंग को पवित्र मानते लोग | हाँ समाज के वो दोगले लोग || स्त्रियों की इज्जत को तार तार करने वाले,  नवरात्रि में आदिशक्ति का उपवास करते लोग | हाँ समाज के वो दोगले लोग || --अंकिता तंतुवाय

"झलकारी बाई : एक वीरांगना (कविता) " By Ankita Tantuway

 बैठिये थोड़ा ठहर के, रखके मेरी बात को | वीरांगना की एक ये गाथा ,सुनाती हूँ मैं आपको | उन्नीसवी शताब्दी का दौर वो चल रहा था | जब व्यक्ति अत्याचार से डर डर के पल रहा था| भय से भरे उस दौर में भी, थी लड़ती एक योद्धा नारी | साहस का परचम लहरा गयी, हाँ हाँ वो ही थी झलकारी | भोजला गाँव में जन्मी ये , पिता का सम्मान बनी | माँ थी जमुना देवी सुनो, सदोवर सिंह की आन बनी | बचपन से ही युद्ध में कौशल, हर शस्त्र संग खेली थी | तलवारें और तीरंदाजी, मानो उसकी कोई सहेली थी | बहादुरी की क्या बात करूँ, ऐसा एक किस्सा पिरो डाला | जंगल में आया बाघ सामने, कुल्हाड़ी से काट गिरा डाला | पूरण सिंह कोरी के संग , ब्याह रचा झलकारी का | वक़्त आ गया अग्नि बनना, उस छोटी सी चिंगारी का | पूजा में देख झलकारी को, झांसी की रानी दंग हुई | मिलते जुलते दोनों के चेहरे, तब से ही वे संग हुई | दुर्गा सेना में हो शामिल , बन गयी और शक्तिशाली वो | लक्ष्मी बाई का बन कवच, बन गयी उनकी रखवाली वो | अठरह सौ संतावन का , जब युद्ध लड़ा महारानी ने | फिरंगियों को धर दबोचा , रण में ही इस जनानि ने | वेश बदल महारानी का, नित्य उसने संघर्ष किया ...