"पढ़ते हुए संविधान को, अखबार याद आ गया " By Ankita Tantuway

पढ़ते हुए संविधान को ,अखबार याद आ गया

जुल्म की खबरे थी इतनी ,मन मेरा घबरा गया


पढ़े आर्टिकल संशोधन इसके, लगा बड़ा मजबूत है

पालन कैसा हो रहा देश में, पनपता अपराध सबूत है


मारपीट हो गरीबों से, या बात हो दुष्कर्म की

अपराध ऐसे जी रहा, कि न चली किसी धर्म की 


मासूम तक मजबूर है , कह रहे कर लो दया 

भयभीत मुझको कर रही, हर रोज बढ़ती निर्भया


मणिपुर बना गुनाह केंद्र, यूँ ही घरों को जलाया गया

शर्मशार हुई मानवता फिर, बेटी को निवस्त्र घुमाया गया


जब देश की व्यवस्था, आज हो रही ध्वस्त है 

तो मतों की भिखारी , बस राजनीति में व्यस्त है 


सोचने को हूँ विवश मैं , कानून का क्यों शोर नहीं

इतनी शिथिलता है यहाँ, प्रशासन का क्यों जोर नहीं


कहने को तो ये दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है

फिर क्यों हिंसा बढ़ रही, क्यों देशवासी परेशान है..... 

कि फिर क्यों हिंसा बढ़ रही, क्यों देशवासी परेशान है..... 


~ अंकिता तंतुवाय ✍️

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