"झलकारी बाई : एक वीरांगना (कविता) " By Ankita Tantuway
बैठिये थोड़ा ठहर के, रखके मेरी बात को |
वीरांगना की एक ये गाथा ,सुनाती हूँ मैं आपको |
उन्नीसवी शताब्दी का दौर वो चल रहा था |
जब व्यक्ति अत्याचार से डर डर के पल रहा था|
भय से भरे उस दौर में भी, थी लड़ती एक योद्धा नारी |
साहस का परचम लहरा गयी, हाँ हाँ वो ही थी झलकारी |
भोजला गाँव में जन्मी ये , पिता का सम्मान बनी |
माँ थी जमुना देवी सुनो, सदोवर सिंह की आन बनी |
बचपन से ही युद्ध में कौशल, हर शस्त्र संग खेली थी |
तलवारें और तीरंदाजी, मानो उसकी कोई सहेली थी |
बहादुरी की क्या बात करूँ, ऐसा एक किस्सा पिरो डाला |
जंगल में आया बाघ सामने, कुल्हाड़ी से काट गिरा डाला |
पूरण सिंह कोरी के संग , ब्याह रचा झलकारी का |
वक़्त आ गया अग्नि बनना, उस छोटी सी चिंगारी का |
पूजा में देख झलकारी को, झांसी की रानी दंग हुई |
मिलते जुलते दोनों के चेहरे, तब से ही वे संग हुई |
दुर्गा सेना में हो शामिल , बन गयी और शक्तिशाली वो |
लक्ष्मी बाई का बन कवच, बन गयी उनकी रखवाली वो |
अठरह सौ संतावन का , जब युद्ध लड़ा महारानी ने |
फिरंगियों को धर दबोचा , रण में ही इस जनानि ने |
वेश बदल महारानी का, नित्य उसने संघर्ष किया |
गोरों को चकमा देकर के ,झाँसी को फिर प्रकर्ष किया |
रानी समझ झलकारी पर बार बार प्रहार किया |
वो झुकी नहीं, बस डटी रही दुष्टों का संहार किया |
बलिदान था इतना अद्भुद, इतिहासों में नाम दर्ज हुआ |
भारत की इस बहादुर बेटी का हम सब पर कर्ज हुआ |
इस मिट्टी पर सर्वस्व न्यौछावर, करने वो नारी आई थी |
वो वीरांगना और कोई नहीं, हाँ हाँ झलकारी बाई थी. .....
हाँ हाँ झलकारी बाई थी....
-- अंकिता तंतुवाय ✍️
Very well written 📝
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